करी पत्ता या मीठा नीम के फायदे है हैरान कर देने वाले।

कड़ी पत्ते का उपयोग खास तौर से दक्षिण भारतीय व्यंजनों में किया जाता है, लेकिन मध्यक्षेत्र और महाराष्ट्र में इसका प्रयोग खूब किया जाता है। और हां, कड़ी का स्वाद तो इस कड़ी पत्ते के बिना अधूरा ही लगता है, तभी तो इसे कड़ी पत्ता कहते हैं। आखिर क्यों आवश्यक रूप से प्रयोग किया जाता है कड़ी पत्ता? जानिए 5 बेहतरीन कारण – 

1 अगर आप डाइबिटीज के रोगी हैं, तो कड़ी पत्ता अपने भोजन में शामिल करने पर आप इस समस्या से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए यह बेहद फायदेमंद है।

2 कफ होने, कफ सूख जाने या फेफड़ों में जमाव की स्थिति में कड़ी पत्ता आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। इसके लिए कड़ी पत्ते को पीसकर या फिर इसका पाउडर शहद के साथ सेवन करें।

3 आयरन और फॉलिक एसिड के एक बेहतरीन स्त्रोत कड़ी पत्ता आपके शरीर को आयरन सोखने में मदद करता है और एनीमिया जैसी सम्स्याओं से आपको बचाता है। रोजाना खालीपेट कड़ी पत्ता और खजूर खाने से लाभ होगा।

किसी भी तरह के त्वचा संबंधी रोग में कड़ी पत्ता फायदेमंद है। लंबे समय से अगर आप मुहांसे या अन्य समस्याओं से परेशान हैं तो प्रतिदिन कड़ी पत्ता खाएं और इसका पेस्ट बनाकर लगाएं।

5 बालों को घना, काला और मजबूत बनाने के लिए आप इसका प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए नारियल तेल में कड़ी पत्ते को उबालकर उस तेल को बालों में लगाएं और अच्छी तरह से मालिश करें। 

6 पाचन संबंधी समस्या हो या फिर दस्त लगने पर कड़ी पत्ते को पीसकर छाछ में मिलाकर पिएं। यह पेट की गड़बड़ी को भी शांत करेगा और पेट के सभी दोषों का निवारण करने में सहायक होगा।

अदरक मे छुपे हैं कई गुण

1 . सर्दी और कफ के लिए : सर्दी और कफ के लिए अदरक का उपयोग तो बहुत पहले से किया जाता रहा हैं. अदरक के रस में शहद मिला कर सेवन करने से सर्दी और कफ में बहुत आराम मिलता हैं.

2. उल्टी या वमन में : पानी में अदरक के कुछ टुकड़े डाल के अच्छे से उबाल ले उसको उसमे निम्बू और शहद मिलकर पिए बहुत फायदा होता हैं. ५ ग्राम अदरक में काली मिर्च और काला नमक मिलाकर लेने से उल्टी में आराम मिलता हैं.

3 . भूख ना लगने पर : बिमारी से उठने के बाद या अपच हो जाने पर भूख नहीं लगती ऐसे में अदरक के बारीक़ टुकड़े को कला नमक के साथ खाने से भूख लगती हैं, खाने की इच्क्षा बढती हैं.

4 . अपच की शिकायत में : अगर भोजन पचने में दिक्कत आ रही हो, खट्टे ढकार, गस, बदहजमी हो गया हो तो ऐसे में अदरक का सेवन उत्तम हैं. अदरक में निम्बू सादा नमक अजवाइन पानी में मिलाकर या चाय बनाकर पीने से लाभ होता हैं. पेट में गैस से निजात दिलाता है अदरक ,सौफ ,इलाइंची, काली मिर्च सबको लेकर पानी में उबाल ले पानी जब आधा बच जाये तो उसको पी ले इससे पेट में गैस की समस्या से राहत मिलता हैं.

5. रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाती हैं : अदरक हमारे रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं.शरीर को मौसम परिवर्तन में होने वाले वायरल या सर्दी जुकाम से बचाती हैं.

6 . हड्डियों के लिए उत्तम : अदरक हड्डियों के लिए बहुत उत्तम हैं. अदरक हड्डियों को मजबूती देता हैं. आर्थराइटिस या गढ़िया रोग में फायदा : ४ चम्मच सौठ (सुखा अदरक), २ चम्मच काला जीरा पीसा हुआ ,२ चम्मच काली मिर्च पीसी हुइ, मिला कर थोडा थोडा ले इससे आर्थराइटिस में बहुत फायदा मिलता हैं.

7. दांतों और मसुरो के लिए अच्छा हैं : अदरक के सेवन से दांत और मसूड़े दोनों स्वस्थ रहते हैं. अदरक में एंटी फंगल तत्व पाए जाते हैं, जो की दांतों से कीड़ो को खत्म कर देता हैं और मसुडो को सुजन से बचाता हैं.

8 . ह्रदय के लिए बहुत अच्छा हैं : अदरक के सेवन से ह्रदय की क्रियाशीलता बढ़ जाती हैं अदरक में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. इससे हृदय स्वस्थ रहता हैं. रक्त में मिले टोक्सिन को ख़त्म करता हैं. ह्रदय जवान बना रहता हैं.

9 . तनाव को कम करता हैं : अगर बहुत काम करके थक गए हो या तनाव मह्शूश हो रहा हो तो अदरक की चाय पी ली जाए तो बहुत अच्छा मह्शूश होता हैं. तनाव कम होता हैं. थकान और कमजोरी से भी आराम दिलाता हैं. पीसा हुआ सौठ (सुखा अदरक) पाउडर ,काली मिर्च ,इलांची,और जीरा को पानी में उबाल के पिए .

10 . एंटी इन्फ्लामंट्री तत्व : अदरक में एंटी इन्फ्लामंट्री तत्व पाए जाते हैं. अदरक को प्राकृतिक दर्दनिवारक भी कहते हैं. अदरक को पीस कर उसमे कर्पूर मिला कर पेस्ट तैयार कर दर्द अथवा सुजन की जगह लगा दिया जाए तो बहुत आराम मिलता हैं.

11 . एंटी फंगल तत्व : अदरक में एंटी फंगल तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में होने वाले फंगल संक्रमण से बचाव करता हैं.

अन्य उपयोग : अदरक की तासीर गर्म होती हैं इसलिए ठण्ड में ज्यादा उपयोग में लाया जाता हैं. अदरक का उपयोग सर्दी, जुकाम, नजले में बिशेष उपयोग किया जाता हैं. अगर किसी किसी को अदरक नहीं पचता तो कृपया वो इसक उपयोग न करें. जिन्हें कोई परेशानी नहीं होती वो इसे आराम से उपयोग में ला सकते हैं.

खाली पेट पानी पीने के है जबरदस्त फायदे।।

सुबह खाली पेट पानी पीने के अनेको फायदे हैं। अगर आप अपनी बीमारियों को काबू में करना चाहते हैं तो रोज सुबह उठ कर ढेर सारा पानी पियें। खाली पेट पानी पीने से पेट की सारी गंदगी दूर हो जाती है और खून शुद्ध होता है जिससे आपका शरीर बीमारियों से दूर रहता है।

हमारा शरीर 70% पानी से ही बना हुआ है इसलिये पानी हमारे शरीर को ठीक से चलाने के लिये कुछ हद तक जिम्‍मेदार भी है।

बेस्‍ट रिजल्‍ट पाने के लिये आपको सुबह उठते ही तुरंत 1.5 लीटर पानी जिसका मतलब है 5-6 गिलास पानी पीना चाहिये। पानी पीने के 1 घंटे तक कुछ भी ना खाएं। इसके अलावा आपको इस बात का भी ध्‍यान रखना चाहिये कि आपने रात में शराब का सेवन ना किया हो। तो चलिये देखते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीने से आपको कौन – कौन से फायदे हो सकते हैं।

त्‍वचा बनाए चमकदार::

कहा जाता है कि पानी आपके खून से घातक तत्‍वों को बाहर निकालता है जिससे त्‍वचा चमकदार बनती है

नई कोशिकाएं बनें:

सुबह सबसे पहले पानी पीने से मासपेशियों और नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।
मोटापा घटाए:
जब आप सुबह ठंडा पानी पीते हैं तब आपके शरीर का मैटाबॉलिज्‍म 24 % तक और बढ़ जाता है, जिससे आप जल्‍द ही वेट कम कर लेते हैं।

पेट साफ रखे:

सुबह कुछ भी खाने से पहले अगर आप पेट भर पानी पीते हैं तो आप पेट अच्‍छी तहर से साफ होगा जिस वजह से आपका शरीर पोषक तत्‍व को आसानी से ग्रहण कर पाएगा।

बीमारियां दूर करे:

पानी पीने से गले की बीमारी, मासिक धर्म, कैंसर, आंखों की बीमारी, डायरियां, पेशाब संबन्‍धित बीमारी, किड़नी, टीबी, गठिया, सिरदर्द और तमाम तरह की बीमारियां आपके शरीर से दूर रहेंगी।

आपकी भूख बढाए

पानी पी कर जब आपका पेट साफ हो जाता है, तब इस प्रकार से आपको भूख लगती है। इससे आपका सुबह का ब्रेकफास्‍ट अच्‍छा होता है।

खून बनाए

खाली पेट पानी पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढने लगती हैं।

स्त्री रोग लूकोरिया के प्राकृतिक उपाय

लिकोरिआक्या है?

लिकोरिआ वह स्थिति होती है जो महिलाओं में योनि के क्षेत्र को प्रभावित करती है। इसे व्हाइट भी कहा जाता है क्योंकि इसमें एक सफ़ेद रंग का स्त्राव होता है। सामान्यत: यह श्वेत स्त्राव शरीर के अंदर जाने वाले बैक्टीरिया तथा अन्य सूक्ष्म जीवों को बाहर निकलने का काम करता है।

सामान्यत: यह स्त्राव हल्का सफ़ेद या साफ रंग का और बद्बूराहित होता है परन्तु कभी कभी यह अलग रंग का भी होता है जो इसकी रचना पर निर्भर करता है।
यदि यह परतदार एपीथेलियम और बलगम से बना होता है तो इस स्त्राव का रंग नीला सफ़ेद होता है और यदि इसमें पस और बैक्टीरिया होता है तो इसका रंग पीला और हरा होता है

भिंडी:

भिंडी में कई उपयोगी खनिज पाए जाते हैं जो योनिशोथ में लाभकारी होते हैं। 100 ग्राम भिंडी लें तथा उसमें एक लीटर पानी मिलाएं। इसे कम से कम 20 मिनिट तक उबालकर उसका अर्क बनायें। ठंडा होने के बाद इसमें मीठा मिलाएं तथा इसे प्रतिदिन जितना अधिक संभव हो पीयें। ऐसा तब तक करें जब तक लक्षण दूर न हो जाएँ।

आम की गुठली:

आम की गुठली को सुखाकर, पीसकर उसका चूर्ण बनायें। योनिशोथ के उपचार के लिए इस चूर्ण में थोडा पानी मिलाकर एक पेस्ट बनायें। योनि के बाहरी तथा आंतरिक भाग में इस पेस्ट को लगायें।

मेथी के दाने:

ठंडे पानी में मेथी के दाने मिलाएं तथा धीमी आंच पर इसे लगभग 30 मिनिट तक उबालें। इसे छानें तथा इसका उपयोग योनि को धोने के लिए करें। चाय में मेथी के दाने डालकर उसे पीने से भी बहुत आराम मिलता है।

अमरुद की पत्तियां:

अमरुद के पत्तियों को पानी में भिगोयें तथा 30 मिनिट तक धीमी आंच पर उबालें। इसे छान लें तथा इस पानी का छिडकाव योनि के क्षेत्र में करें जब तक लक्षण गायब न हो जाएँ।

धनिया के बीज (हरा धना):

योनिशोथ की समस्या में धनिये के बीज बहुत लाभकारी होते हैं। इन्हें रात भर पानी में भिगोकर रखें। सुबह इस पानी को छान लें तथा खाली पेट इसे पीयें। अच्छे परिणामों के लिए कम से कम एक सप्ताह तक ऐसा करें।

अखरोट की पत्तियां:

अखरोट की पत्तियों में स्तंभक गुण होता है जो संक्रमण को ठीक करने और योनिशोथ के उपचार में सहायक होता है। अखरोट की पत्तियों को पानी में डुबाकर रखनें और लगभग 20 मिनिट तक उबालने से जो अर्क बनता है उसका उपयोग गुप्तांगों को धोने के लिए करें। अच्छा और शीघ्र आराम प्राप्त करने के लिए दिन में कम से कम तीन बार ऐसा करें।

चांवल का पानी:

चांवल धो लें तथा उसमें से पानी निकाल लें। पीने से पहले इस पानी में शहद या शक्कर मिलाकर इसे मीठा कर लें। खुजली होने पर और चक्कर आने पर यह एक उत्तम घरेलू उपचार है।

सुपारी:

योनिशोथ के उपचार में सुपारी बहुत प्रभावकारी होती है। खाना खाने के बाद कुछ सुपारी खाएं। यह भविष्य में होने वाले योनिशोथ की रोकथाम में भी सहायक होती है। कुछ सुपारी लें तथा उसमें गुलाब की कुछ पंखुड़ियां मिलाकर इन्हें मसलें। इसमें थोड़ी शक्कर मिलाएं। इसे पी लें या इससे अपने गुप्तांगों को धोएं।

अगर आपको होती है गैस तो करे ये उपाय।।

पेट की ज्यादातर बीमारियों में गैस की समस्या सबसे आम है, जो ज्यादातर लोगों को होती है। पेट में गैस बनने के कई कारण होते हैं। कभी यह आपके भूखे रहने या गलत खानपान के कारण होती है, तो कभी कुछ अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते गैस की समस्या, उसके कारण और उपायों के बारे में – 

छोटी उम्र से लेकर युवाओं और बुजुर्गों में भी पेट मे अम्ल की अधिकता के कारण गैस की समस्या हो सकती है। पहले जानते हैं गैस बनने के कारणों को –

 गैस बनने का प्रमुख कारण पेट में अम्ल का निर्माण होता है। इसके अलावा अत्यधिक भोजन करना, मानसिक चिंता, ऐसा भोजन जो पचने में कठि‍न हो, शराब पीना, और भोजन को ठीक तरीके से चबाकर न खाने से भी पेट में गैस बनती है।
 

2  कई बार कुछ बीमारियों जैसे – वायरल फीवर, किसी प्रकार का इंफेकशन, पथरी, ट्यूमर, अल्सर आदि के कारण भी पेट में गैस बनना स्वभाविक है।
 

3  कई बार कुछ बैक्टीरिया के कारण भी यह समस्या हो सकती है जिसमें खास तौर से उल्टी, दस्त, पेट में जलन और अपच की समस्याएं सामले आती हैं।
 

4  इसके अलावा एसिडिटी, बदहजमी, फूड पॉइजनिंग,कब्ज और कुछ विशेष दवाओं के सेवन से भी गैस बनने की समस्या हो जाती है। तीखा या चटपटा भोजन भी इसका एक प्रमुख कारण है।

गैस की समस्या का निराकरण अगर शुरूआती दिनों में ही हो जाए, तो इसके गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। इसके लिए गैस के प्रमुख लक्षणों को जानना बेहद जरूरी है- 
 

भूख न लगना, बदबूदार सांसें, पेट में सूजन, उलटी, बदहजमी, दस्त आदि गैस के प्रमुख लक्षणों में शामिल है। पेट में गैस बनने पर पेट फूलना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।  

गैस की से निपटने के कुछ आसान और घरेलू उपाय 

1  नीबू के रस में 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर सुबह के वक्त खाली पेट पीने से गैस की समस्या से निजात मिलती है। इसे गर्म पानी के साथ भी पि‍या जा सकता है।

2  काली मिर्च का सेवन करने पर पेट में हाजमे की समस्या दूर हो जाती है, जिससे गैस नहीं होती। इस समस्या को दूर करने के लिए दूध में काली मिर्च मिलाकर ले सकते हैं।

 एक गिलास गर्म पानी में हींग मिलाकर पीने से गैस में लाभ होता है। यह प्रयोग दिन में ३ बार करने से गैस की गंभीर अवस्था में भी लाभ होता है। इसके अलावा सिर्फ गर्म पानी पीने से भी पाचन की समस्या दूर होगी।

 पेट में जलन होने पर धनिया पत्ती को कच्चा खाने से लाभ होता है। इसके अलावा छाछ में भुने हुए धनिये के पत्ते डालकर पीने से भी गैस की समस्या में लाभ होता है।

 छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या में काफी लाभ मिलता है। गैस से तुरंत निजात पाने के लिए यह काफी असरदार उपाय है।

 दालचीनी भी गैस की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है। इसके लिए दालचीनी को पानी मे उबालकर, ठंडा कर लें और सुबह खाली पेट पिएं। इसमें शहद मिलाकर पिया जा सकता है।

7 लहसुन भी गैस की समस्या से निजात दिलाता है। लहसुन को जीरा, खड़ा धनिया के साथ उबालकर इसका काढ़ा पीने से काफी फादा मिलता है। इसे दिन में 2 बार पीना बेहतर होगा।

 दिनभर में दो से तीन बार इलायची का सेवन पाचन क्रिया में सहायक होता है और गैस की समस्या नहीं होने देता। इसके अलावा रोज एक अदरक का टुकड़ा चबाने से भी लाभ होता है।

9  पुदीने की पत्तियों को उबाल कर पीने से गैस से निजात मिलती है। इसके अलावा बाजार में उपलब्ध पुदीने को पानी में मिलाकर भी पिया जा सकता है।  

10  रोजाना नारियल पानी सेवन करना गैस का फायदेमंद उपचार है। इसके अलावा सेब का सिरका भी गर्म पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है। आलू के रस का खाली पेट सेवन भी बेहद फायदेमंद होता है।

इस सभी उपचार के अलावा सप्ताह में एक दिन उपवास रखने से भी पेट साफ रहता है और गैस की समस्या पैदा नहीं होती।

जौ के इतने फायदे आपको किसी ने नहीं बताए होंगे।।।

जौ का पानी एक ऐसा पेय है जो कि जौ को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है। यदि इसमें थोड़ी सी चीनी और नींबू भी मिला दिया जाये तो यह एक शानदार पेय पदार्थ बन सकता है। जौ के पानी में इतने स्वास्थ्य लाभ हैं कि आप सुनकर चौंक जाएँगे। हम आपको बताते हैं जौ का पानी कैसे बनाया जाये और यह किस प्रकार स्वास्थ्य लाभ हैं।

जौ का पानी कैसे बनाएँ

इसकी एक सर्विंग बनाने के लिए एक सौस पैन में 2 टेबल स्पून जौ में 1 कप पानी मिला लें। जब तक जौ नरम हों तब तक इसे उबालें। इस मिश्रण को एक जालीदार कपड़े से छान लें। आप छिलके वाले और बिना छिलके वाले दोनों में से किसी भी प्रकार के जौ ले सकते हैं। छिलके वाले में ज्यादा फाइबर होता है और पकाने में ज्यादा समय लगता है इसलिए बिना छिलके वाले पकाने में आसान हैं।

जौ के पानी के स्वास्थ्य लाभ

. इसमें मौजूद बीटा–ग्लूकेन शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर मल द्वारा बाहर निकालने में मदद करता है और बवासीर के खतरे को कम करता है। यह आपको कब्ज से राहत देता है, आंतों को साफ रखता है जिससे की पेट के कैंसर की संभावना कम हो जाती है।

. यह मूत्रवर्धक के रूप में काम करता है यह बेकार पानी और विषैले पदार्थों को मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकाल देता है।

. यह गर्मी को कम करता है इसलिए गर्मी में इसका सेवन फायदेमंद है। चूंकि यह ठंडक करता है इसलिए यदि तेज मसालेदार खाने से आपके पेट में जलन हो रही है तो यह आपको राहत दे सकता है।

. जौ एंटी-इंफ़्लामेंट्री है। गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों को जौ के पानी से फायदा मिलता है।

. इसका बीटा –ग्लूकेन शरीर में ग्लूकोज के अवशोषण को कम करता है जिससे ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखता है। इसका मतलब है कि कि यदि आपको शुगर है तो जौ का पानी पीने से आपका शुगर लेवल नियंत्रण में रह सकता है।

. इस पानी का एक गिलास रोजाना सेवन फाइबर की आवश्यकता को पूरी करता है।

फाइबर की अधिकता के कारण कोलेस्ट्रोल के सत्र को कम करता है। और दिल को स्वस्थ रखने में सहायक है।।

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