स्लाद खाओ वजन घटाओ


आमतौर पर खाने के साथ सलाद खाना जहां एक परंपरा है, वहीं ऐसा माना जाता है कि इससे खाना जल्दी हजम होता है। एक शोध के अनुसार आधे से अधिक लोगों को ये नहीं पता को स्लाद खाना कब चाहिए।

बहुत से लोग स्लाद को खाने के साथ खाते है और बहुत सारे खाने के बाद तक स्लाद खाने में लगे रहते है लेकिन ये स्लाद खाने का सही तरीका नही है।।

स्लाद खाने से आधे घण्टे पहले खाना चाहिए ताकि आप को भूख कम लगे और आप खाना खाए और आपका पेट भी भरा रहे।

यही नहीं, आपको ऐसे युवा भी मिल जाएंगे जो एक टाइम के खाने की जगह सलाद खाना पसंद करते हैं। वास्तव में इसके पीछे कारण यही है कि सलाद में विटामिन्स और तमाम ऐसे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो आपको ना सिर्फ सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपको अनेक बीमारियों से भी बचाते हैं। क्या हैं सलाद के फायदे और कैसे सलाद खाने से वजन कम किया जा सकता है

सलाद क्या है?
• सबसे पहले सलाद क्या है, यह जानना जरूरी है। सलाद में आप कई चीजों को शामिल कर सकते हैं, जैसे प्याज, हरीमिर्च, अदरक, टमाटर, बंद गोभी, खीरा, नींबू, मूली, गाजर, अंकुरित मोंठ, चने आदि।
• लोग सलाद में कम कैलोरी वाले फल भी खाते है जैसे अमरूद, सेब, संतरा, मौसमी आदि।
• बहुत से लोग होते हैं, जो तेजी से अपना वजन कम करना चाहते हैं। डाक्टर भी उन्हें सलाद खाने की सलाह देते हैं।

सलाद के जरिये अपना वजन कम करने के तरीके
• यदि आप प्रभावी रूप से सलाद के जरिये वजन कम करना चाहते हैं तो उसके भी कुछ नियम हैं, जैसे सलाद खाने से पहले अच्छी तरह धोएं और फोक को भी अच्छी तरह से धो लें। इससे ना केवल सलाद में आपको फ्लेवर मिलेगा बल्कि कैलोरीज भी कंट्रोल रहेंगी।
• जब आप सलाद खा रहे हों तो फोक को नीचे रखें। यानी पहले मुंह का खत्म होने दें उसके बाद ही दोबारा खायें। यह छोटी सी ट्रिक आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।
• पनीर की बजाय फाइबरयुक्त सब्जियां जैसे ब्रोकली और बंदगोभी को प्राथमिकता दें। आपके सलाद में फाइबर की अधिक मात्रा कैलोरीज बर्न करने में मददगार साबित होती है। इससे ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहता है।
• वजन कम करने में एक अन्य चीज मददगार साबित होती है। वह यह है कि आप इस पर भी नजर रखें कि आप कितनी कैलोरीज ले रहे हैं और किन रूपों में। ऐसा सलाद ना खाएं, जिसमें कैलोरीज ज्यादा होती है। अन्यथा सलाद के जरिये वजन कम करने का आपका सपना अधूरा ही रह जाएगा।

रेस्तरां में या जंक या फास्ट फूड के साथ मिलने वाले सलाद पर भरोसा ना करे। इस सलाद में कैलोरीज ज्यादा होती हैं, जिससे वजन कम होने के बजाय बढ़ता है। यानी आप सलाद खाने के इच्छुक हैं तो कच्ची सब्जियां खाएं।

नाश्ता करना बहुत जरुरी है।।

आजकल की भागमभाग जिन्‍दगी में लोग की दिनचर्या में इतना ज्‍यादा परिवर्तन आ गया है कि वे नाश्‍ता करना भी भूल जाते हैं या फिर उसे करने का समय नहीं मिलता है। इससे उनकी शारीरिक क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। क्‍या आपको प्रतिदिन सुबह नाश्‍ता करने के लाभ के बारे में पता हैं। अगर नहीं पता है तो बोल्‍डस्‍काई के इस आर्टिकल को पढ़ें:

8 घंटे की नींद पूरी करने के बाद आप तरो-ताजा हो जाते हैं लेकिन आपके शरीर को ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। ऐसे में आपका नाश्‍ता करना बहुत जरूरी हो जाता है। वो भी हेल्‍दी नाश्‍ता होना चाहिए। अगर आप जानना चाहते हैं कि प्रतिदिन नाश्‍ता करने के क्‍या फायदे होते हैं, तो इसे पढ़ें:

मेटाबोल्जिम के लिए:

अगर आप अपने दिन की शुरूआत हेल्‍दी फूड से करते हैं तो आपके शरीर का उपापचय यानि मेटाबोल्जिम अच्‍छा रहता है।

शुगर लेवल:

सुबह-सुबह नाश्‍ता करने से सुगर लेवल संतुलित ही रहता है। जो लोग डायबटीज से पीडित होते हैं उनके लिए नाश्‍ता करना बहुत जरूरी होता है, वरना उनका सुगर लेवल बढ़ सकता है।

ज्‍यादा खाने की आदत घटेगी:

जो लोग नाश्‍ता नहीं करते हैं उन्‍हे सारा दिन कमजोरी लगती रहती है और वे हर समय कुछ न कुछ खाते रहते हैं। इससे उनकी ऊटपटांग खाने की आदत बढ़ जाती है और वे कमजोर भी हो जाते हैं।

वजन घटाने में सहायक:

जो महिलांए वजन घटाने को आतुर रहती हैं उनके लिए नाश्‍ता करना बेहद आवश्‍यक होता है। नियमित रूप से नाश्‍ता करने से वजन घटाने में सहायता मिलती है

ऊर्जा के लिए आवश्‍यक:

शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा सुबह के नाश्‍ते से ही मिलती है। इसलिए जो नाश्‍ता नहीं करता है उसके शरीर को प्रॉपर ऊर्जा नहीं मिल पाती है।

एकाग्रता के लिए अच्‍छी:

आठ घंटे की नींद के बाद आपके दिमाग को रिलेक्‍स मिल जाता है और नाश्‍ता करने के बाद ऊर्जा मिल जाने से एकाग्रता भी अच्‍छी हो जाती है।

मूड के लिए भोजन:

अगर आपका मूड उखड़ा – उखड़ा रहता है तो आपकी नाश्‍ता न करने की आदत इसकी जिम्‍मेदार है। नाश्‍ता करें और फिर अपने मूड में आए पॉजीटिव चेंज को समझें।

सुपरफूड जो बना देंगे आपकी सेहत।।

सुपर फूड उन खाद्य पदार्थो को कहा जाता है, जिनमें पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये चीजें प्राकृतिक होती हैं जिनसे शरीर पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। जानते हैं इनके बारे में-

बादाम

इसमें मैगनीशियम, पोटेशियम और विटामिन ई भरपूर मात्रा मे होता है। इनमें कम कैलोरी होने की वजह से यह दिल की सेहत के लिए अच्छे होते हैं। रोजाना 3-5 बादाम खा सकते हैं। बादाम शेक बनाने के लिए 5-7 बादाम को पीसकर एक कप दूध में मिला लें और स्वादानुसार चीनी प्रयोग करें।

पालक

नियासिन, जिंक और फाइबर से भरपूर पालक में कैलोरी काफी कम और पोषक तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। पालक बढ़ती उम्र में हडि्डयों की क्षति, मोतियाबिंद, कैंसर और दिल संबंधी रोगों से बचाता है। रोजाना एक कटोरी पालक की सब्जी खा सकते हैं।

शहद
इसमें मौजूद नियासिन, अमीनो एसिड, थायमीन और विटामिन बी-6 कोशिकाओं की क्षति को रोकता है। इसमें एक विशेष प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है जो कि पेट में अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि करता है। रोजाना आधे से एक चम्मच शहद खा सकते हैं।

रसबैरी

इसमें पाई जाने वाली एलेजिक एसिड कैंसर से लड़ने में सक्षम है। इसमे मौजूद मंैगनीज और अन्य एंटीऑक्सीडेंट रोगो के प्रति मजबूती प्रदान करते हैं। रोजाना 100 ग्राम खा सकते हैं।

संतरा

एक संतरे से आप दिनभर के लिए जरूरी विटामिन-सी ले सकते हैं। विटामिन-सी, कैल्शियम और फाबइर से भरपूर संतरा आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है।

केला

पोटेशियम की खूबी के साथ केला आपका ब्लड प्रेशर सामान्य बनाए रखता है। इसमे मौजूद स्टार्च आपके मेटाबॉलिज्म को दुरूस्त बनाए रखने का काम करता है। एक से दो केले रोजाना खा सकते हैं।

स्ट्रॉबेरी

इसमें पाया जाने वाला फोलेट दिल को दुरूस्त रखता है। रोजाना चार से पांच पीस स्ट्रॉबेरी खा सकते हैं।

सुपर सेवन स्मूदी

इन सातों फल के गुणों का लाभ एक साथ लेना चाहते हैं तो
2 कप दूध
5-7 बादाम
2 चम्मच शहद
1 केला
1 छिला हुआ संतरा
1/2 रसबैरी
5 स्ट्रॉबैरी और
1 कप उबली पालक को मिक्सर में ब्लैंड कर लें। छानकर स्मूदी का स्वाद लें।

ध्यान रहे
एक सामान्य व्यक्ति को हर छह माह में बॉडी कॉम्पोजिशन टेस्ट कराना चाहिए ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी का पता चल जाए।

दही हैं सर्वगुण सम्पन्न।।

*दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिसके कारण यह दूध की तुलना में जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां, जैसे अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है।

*दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती, तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं।

*डाइजेशन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख खुलकर लगती है। दूध से बनने वाले दही का उपयोग खाने में हजारों सालों से हो रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने वाले कैल्शियम की मात्रा दूध की अपेक्षा दही में 18 गुणा ज्यादा होती है।

*दही का नियमित सेवन शरीर के लिए अमृत के समान माना गया है। यह खून की कमी और कमजोरी दूर करता है। दूध जब दही का रूप ले लेता है। तब उसकी शर्करा अम्ल में बदल जाती है। इससे पाचन में मदद मिलती है। जिन लोगों को भूख कम लगती है। उन लोगों को दही बहुत फायदा करता है।

*दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। पेट में गड़बड़ होने पर दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने या चावल में दही मिलाकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं। पेट के अन्य रोगों में दही को सेंधा नमक के साथ लेना फायदेमंद होता है। दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न कर पाता और हार्टबीट सही बनी रहती है।

दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न कर पाता और हार्टबीट सही बनी रहती है।

*अमेरिकी आहार विशेषज्ञों के अनुसार दही का नियमित सेवन करने से आंतों के रोग और पेट संबंधित बीमारियां नहीं होती हैं।

*दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है और उन्हें मजबूती प्रदान करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी दही सहायक होती है

*दही में दिल के रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की गजब की क्षमता है। यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है।

*हींग का छौंक लगाकर दही खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी है।

*दही में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। यह हड्डियों के विकास में सहायक होता है। साथ ही, दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाता है। इससे मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में मदद मिलती है।

*दही शरीर पर लगाकर नहाने से त्वचा कोमल और खूबसूरत बन जाती है। इसमें नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी और हाथों पर लगाने से शरीर निखर जाता है। दही की लस्सी में शहद मिलाकर पीने से सुंदरता बढ़ने लगती है।

*बवासीर रोग से पीड़ित रोगियों को दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीने से फायदा मिलता है।

ये तेल हैं गुणों की खान

भोजन में तेल और वसा का सही मात्रा में इस्तेमाल बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने में एक अहम भूमिका निभा सकता है। उपयुक्त वसा शरीर को संतुष्टि के अहसास के साथ ही ऊर्जा भी देती है। इस तरह की वसा या तेल चर्बी को घटाने में मददगार हो सकते हैं।

स्वस्थ रहने के लिये 10 आवश्यक तेल

वेबसाइट ‘फीमेलफर्स्ट डॉट को डॉट यूके’ के अनुसार, अच्छी और बुरी वसा के बीच भेद करना पेचीदा हो सकता है, इसलिए यहां शीर्ष आठ स्वास्थ्यवर्धक वसा और तेलों का उल्लेख किया गया है :

  • नारियल तेल :

इसे ‘सुपरफूड’ की उपाधि ठीक ही दी गई है। यह तेल उन लोगों के लिए भी लाभकारी है, जो अपना वजन घटाना या उसे नियंत्रित रखना चाहते हैं। नारियल में मौजूद फैटी एसिड अन्य वसा की तुलना में समग्र चयापचय की गति बढ़ाते और ऊर्जा की खपत करते देखे गए हैं। नारियल का तेल मस्तिष्क संबंधी विकारों में भी मदद कर सकता है। यह आम समस्याओं में भी काफी लाभदायक हो सकता है। यह चोट के निशान घटाने में भी मददगार है।

  • बोरेज (योरोपियन पौधा) का तेल :

बोरेज के बीज में सबसे ज्यादा लिनोलेनिक एसिड होता है। इसका एक्जिमा, सोरायसिस और संधिशोथ जैसी बीमारियों में बड़े पैमाने पर ज्वलनरोधक के रूप में इस्तेमाल किया गया है।

  • भांग के बीज का तेल :

भांग का तेल या भांग के बीज ओमेगा फैटी एसिड 3, 6 और 9 का संतुलित मिश्रण है। शोध में बताया गया है कि इसका तेल दिल की सेहत बनाए रखता है और उसकी सही गतिविधियों को बढ़ावा देता है। इस तेल का बालों, त्वचा और नाखून पर सकारात्मक असर होता है। रोजाना भांग का तेल खाने व लगाने वालों के बाल चमकदार व मोटे और त्वचा मुलायम होती है।

  • पटसन या सन का तेल :

इस तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड का जबर्दस्त सम्मिश्रण होता है। देखा गया है कि सही मात्रा में इसका सेवन दिल की सेहत सुधारने के साथ ही पेट के कैंसर की आशंका को कम करता है।

  • सीताफल के बीज का तेल :

यह महिला और पुरुष दोनों के लिए लाभदायक है। शोध में पाया गया है कि यह तेल महिलाओं में रक्तचाप, सिर दर्द और रजोनिवृत्ति के अन्य लक्षणों को कम कर सकता है

  • नासपाती का तेल :

यह तेल त्वचा निखारने संबंधी खूबियों के लिए जाना जाता है। यह अपने आपमें नरिशिंग, मॉश्चराइजिंग और सुरक्षात्मक वसा के साथ ही विटामिन ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट समेटे हुए है, जो त्वचा को मुलायम व कांतिपूर्ण बनाते हैं।

  • ओमेगा 3 फिश (मछली) ऑयल :

यह विवादास्पद रूप से सर्वश्रेष्ठ किस्म की वसा है। मछली के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। इन एसिड का हृदय व मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव होता है।

  • जैतून का तेल :

यह तेल हृदय की गतिविधियों को सुधारने, शरीर में साफ खून का संचार बनाए रखने, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली बेहतर करने में विशेष रूप से सहायक है।

Low BP के कारण और लक्षण

रक्तचाप का सामान्य न होकर निम्न सा उच्च स्तर पर होना, स्वास्थ्य के लिए हमेशा नुकसानदायक ही होता है, लेकिन निम्न रक्तचाप को अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते, जिसके हानिकारण परिणाम हो सकते हैं। जानिए निम्न रक्तचाप के बारे में आवश्यक बातें –  

सामान्य तौर पर किसी भी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 के स्तर पर होना नॉर्मल होता है और इसमें थोड़ा बहुत अंतर भी सामान्य होता है। लेकिन यदि इसका स्तर 90/60 या उससे भी कम है, तो इसे निम्न रक्तचाप या लो ब्लडप्रेशर माना जाता है। जानिए इसके प्रमुख कारण और लक्षण – 

1 खून की कमी – कई बार शरीर में रक्त की कमी, निम्न रक्तचाप का कारण बनती है।किसी बड़ी चोट या अंदरूनी रक्तस्राव के कारण शरीर में अचानक खून की कमी हो जाती है, जिससे रक्तचाप निम्न हो जाता है।

2 कमजोरी व पोषण की कमी – पोषण की कमी और कमजोरी निम्न रक्तचाप का एक बढ़ा कारण है। जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने पर शरीर पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाती जिससे रक्तचाप निम्न हो जाता है।

3 हृदय रोग – हृदय से जुड़ी किसी भी प्रकार की समस्या होने पर रक्तचाप निम्न हो सकता है।

4 पानी की कमी – शरीर में पानी की कमी से आप कई बार कमजोरी महसूस करते हैं। पानी की कमी से सिर्फ लो ब्लडप्रेशर ही नहीं, स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याएं भी होती हैं जिसमें बुखार, उल्टी, डायरिया आदि शामिल हैं।

5 गर्भावस्था – महिलाओं में गर्भावस्था के समय लो ब्लडप्रेशर की समस्या हो सकती है क्योंकि इस समय सर्कुलेटरी सिस्टम तेजी से बढ़ता है और ब्लडप्रेशर कम हो जाता है।

 अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ अन्य समस्याएं जैसे डायबिटीज, थायरॉयड, एडिसंस डिसीज आदि हैं, तो आप निम्न रक्तचाप के मरीज हो सकते हैं। इसके अलावा किसी प्रकार का टेंशन, सदमा लगने, डर जाने, इंफेक्शन आदि होने पर भी यह समस्या हो सकती है।

 7 अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं और उसवके लिए लगातार दवाईयों का सेवन कर रहे हैं, तब भी यह निम्न रक्तचाप का कारण बन सकता है।

लक्षण – सामान्य तौर पर जब आप अचानक बेहद कमजोरी महसूस करें या चक्कर आने जैसे लक्षण निम्न रक्तचाप के हो सकते हैं। लेकिन प्रमुख रूप से थकान, डिप्रेशन, जी मचलाना, प्यास लगना, धुंधला दिखाई देना, त्वचा में पीलापन, शरीर ठंडा पड़ जाना, आधी-अधूरी और तेज सांसें आना आदि निम्न रक्तचाप के प्रमुख लक्षण हैं।

वजन कम करना है तो खाए अंडे

अंडा खाना सिर्फ शरीर में पोषक तत्वों की पूर्ति या गर्माहट पैदा करना ही नहीं बल्कि वजन घटाना भी है। जी हां, हैरान करने वाली बात तो है लेकिन सच भी है, कि अंडा खाने से आपको बढ़ता हुआ वजन कंट्रोल होने के साथ ही कम भी हो सकता है।यह न केवल आपके फास्ट फूड की आदत पर लगाम लगाएगा बल्कि आपके मेटाबॉलिज्म और फैट गलाने की प्रक्रिया को भी मदद करेगा। जानें 7 दिनों का डाइट चार्ट – 

1  डाइट चार्ट के पहले दिन सुबह के नाश्ते में दो उबले हुए अंडे और कोई भी फल खाएं। आम, चीकू या केला छोड़कर आप कोई भी फल ले सकते हैं। इस दिन दोपहर के खाने में सिर्फ ब्राउन ब्रेड लेना है, वह भी दो या 3 से ज्यादा नहीं। और रात के खाने में भी आपको 2 उबले हुए अंडे लेना है।

2 डाइट चार्ट के दूसरे दिन आपको नाश्ता बिलकुल पहले दिन की तरह ही करना है और दोपहर के खाने में ब्राउन ब्रेड की संख्या कम करके, उसके साथ  कम कैलोरी वाला चीज स्लाइस और टमाटर ले सकते हैं। रात के खाने में दो उबले हुए अंडे काफी होंगे। 

3 तीसरे दिन भी नाश्ता उस प्रकार से करना है लेकिन दोपहर के खाने में परिवर्तन करते हुए ग्रीन सलाद और सिर्फ एक अंडा खाना है। इसके बाद रात के खाने में आप दो उबले हुए अंडे, संतरे या अनानास का जूस और सलाद ले सकते हैं

डाइट चार्ट के चौथे दिन भी आपका नाश्ता वही रहेगा, लेकिन दोपहर के खाने में इस दिन आपको उबली हुई सब्जियां और दो उबले हुए अंडे खाना है। वहीं रात के खाने में अंडा और सलाद, या फिर अगर आप मांसाहारी हैं, तो मछली शामिल कर सकते हैं।

5 अब पांचवें दिन आपको नाश्ते में कोई परिवर्तन न करते हुए दोपहर के खाने में सिर्फ एक फल ही खाना है और रात के खाने में सलाद के साथ 2 उबले हुए अंडे। अगर आप मांसाहारी हैं तो आज आपके पास स्टीम्ड चिकन का विकल्प भी है।

6 डाइट चार्ट के छठवें दिन भी आपका नाश्ता वही रहेगा, लेकिन दोपहर के खाने में आपको टमाटर, हरा सलाद और जूस लेना है। आप चाहें तो इस दिन चिकन भी खा सकते हैं। रात के खाने में आपको उबली हुई या भाप में पकी हुई सब्जियों के साथ एक उबला हुआ अंडा खाना है।

7 डाइट चार्ट के सातवें और आखरी दिन भी आपके नाश्ते में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस दिन दोपहर के खाने में आपको सिर्फ फल खाना है और रात के खाने में सलाद, एक उबला हुआ अंडा और संतरे का जूस। आप चाहें तो भाप में पके चिकन का एक टुकड़ा खा सकते हैं।

इन सात दिनों में अगर आप डाइट चार्ट का सही अनुसरण करते हैं और कोई कोताही नहीं बरतें, तो बेशक आपका वजन कम नजर आएगा।  

पालक में छुपे है कितने ही गुण।।

इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रूप से कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन ‘ए’ एवं ‘सी’ आदि उल्लेखनीय हैं। इन तत्वों में भी लोहा विशेष रूप से पाया जाता है।

लौह तत्व मानव शरीर के लिए उपयोगी, महत्वपूर्ण, अनिवार्य होता है। लोहे के कारण ही शरीर के रक्त में स्थित रक्ताणुओं में रोग निरोधक क्षमता तथा रक्त में रक्तिमा (लालपन) आती है। लोहे की कमी के कारण ही रक्त में रक्ताणुओं की कमी होकर प्रायः पाण्डु रोग उत्पन्न हो जाता है।

लौह तत्व की कमी से जो रक्ताल्पता अथवा रक्त में स्थित रक्तकणों की न्यूनता होती है, उसका तात्कालिक प्रभाव मुख पर विशेषतः होंठ, नाक, गाल, कान एवं आंखों पर पड़ता है, जिससे चेहरे की रंगत अैर लालिमा चली जाती है। कालांतर में संपूर्ण शरीर भी इस विकृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।

लोहे की कमी से शक्ति ह्रास, शरीर निस्तेज होना, उत्साहहीनता, स्फूर्ति का अभाव, आलस्य, दुर्बलता, जठराग्नि की मंदता, अरुचि, यकृत आदि परेशानियां होती हैं।

पालक की शाक वायुकारक, शीतल, कफ बढ़ाने वाली, मल का भेदन करने वाली, गुरु (भारी) विष्टम्भी (मलावरोध करने वाली) मद, श्वास,पित्त, रक्त विकार एवं ज्वर को दूर करने वाली होती है।

आयुर्वेद के अनुसार पालक की भाजी सामान्यतः रुचिकर और शीघ्र पचने वाली होती है। इसके बीज मृदु, विरेचक एवं शीतल होते हैं। ये कठिनाई से आने वाली श्वास, यकृत की सूजन और पाण्डु रोग की निवृत्ति हेतु उपयोग में लाए जाते हैं।

7 गर्मी का नजला, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह लाभप्रद है। यह पित्त की तेजी को शांत करती है, गर्मी की वजह से होने वाले पीलिया और खांंसी में यह बहुत लाभदायक है।

स्त्रियों के लिए पालक का शाक अत्यंत उपयोगी है। युवतियां यदि अपने चेहरे का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए। प्रयोग से देखा गया है कि पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है। इसे भाजी (सब्जी) बनाकर खाने की अपेक्षा यदि कच्चा ही खाया जाए, तो अधिक लाभप्रद एवं गुणकारी है। पालक से रक्त शुद्धि एवं शक्ति का संचार होता है।

गर्भावस्था में कैसा आहार ले।।

गर्भावस्था के दौरान आहार को लेकर हमारे देश में कई भ्रांतियाँ हैं। अक्सर कहा जाता है कि फलाँ चीज मत खाना, नहीं तो बच्चे का रंग काला हो जाएगा। कई समाजों में अनेक तरह के फल और सब्जियाँ गर्भवती महिलाओं के आहार में शामिल ही नहीं किए जाते हैं। अक्सर केले इसलिए नहीं खाने दिए जाते हैं कि इससे गर्भस्थ शिशु को जन्म लेने के बाद सर्दी-जुकाम बना रहेगा। मछली खाने से रोका जाता है, क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को सफेद दाग होने की आशंका जताई जाती है।

गर्भावस्था और आहार

गर्भवती महिलाओं को संतुलित पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। उनके आहार में प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स शामिल होना चाहिए। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में आयरन, फोलिक एसिड की एक गोली रोज लेना जरूरी है। इसकी कमी से नवजात शिशु में कटे तालू और कटे होंठों की समस्या पैदा हो जाती है। दाल, चावल, सब्जियाँ, रोटी और फलों को रोज के आहार में शामिल करें।

सुबह-शाम दूध पीना न भूलें। गर्भस्थ शिशु का शरीर जब बढ़ रहा होता है तब वह अपनी सभी जरूरतें माता के शरीर से लेकर पूरी करता है। फोलिक एसिड को फोलेट भी कहते हैं। यह कई तरह के आहार में विटामिन बी के रूप में विद्यमान होता है। चूँकि आहार से गर्भवती महिला की लौह तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती, इसलिए आयरन फोलिक एसिड की गोलियाँ खाना जरूरी होता है।

क्या करें :

गर्भवती महिलाओं को गहरे हरे रंग की सब्जियाँ जरूर खाना चाहिए। दलिया या साबुत अनाज से बनी रोटियाँ भी अपने आहार में शामिल करना चाहिए। मैदे का उपयोग कम से कम करें। संतरा, अंगूर और केले को रोज की खुराक में शामिल करें। सभी तरह की दालें, बीन्स, दूध और दही रोज के आहार में होना चाहिए। सूखे मेवे विटामिन्स और खनिजों के भरपूर स्रोत होते हैं। गर्भवती महिलाओं को कॉफी, चाय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की मात्रा में कमी करना चाहिए। कोला पेय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है।

कितनी चाहिए कैलोरी :

सामान्य महिला को जहाँ रोजाना 2100 कैलोरी चाहिए, वहीं गर्भवती महिला को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है। स्तनपान कराने वाली महिला को 3000 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए। 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से तथा 35 प्रतिशत कैलोरी वसा यानी तेल, घी और मक्खन से तथा 55 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से आना चाहिए।

वजन की चिंता न करें :

गर्भवती महिला को वजन बढ़ने की चिंता नहीं करना चाहिए। यही वजह है कि कई स्त्री-रोग विशेषज्ञ पहली विजिट के बाद गर्भवती महिला का वजन लेना बंद कर देती हैं, क्योंकि इससे आगे के निदान पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जाहिर है कि गर्भवती महिला का वजन उसके सामान्य वजन से अधिक ही होगा। ऐसे में चिंता की कोई जरूरत नहीं है। महिलाएँ डिलेवरी के चंद महीनों बाद नियमित कसरत और रख-रखाव से सामान्य वजन पर लौट सकती हैं।

साबूदाने है इतना लाभदायक।।

सफेद मोतियों की तरह दिखने वाला छोटे आकार क साबूदान व्रत-उपवास में प्रमुख रूप से खाया जाता है। वैसे तो इसका प्रयोग केवल फलाहार के तौर पर किया जाता है, लेकिन इसके गुणों से अभी तक कई लोग अनजान ही है। अगर आप भी नहीं जानते इसके गुणों के बारे में तो जानिए साबूदाने के यह 10 प्रमुख लाभ – 

1 गर्मी पर नियंत्रण –  एक शोध के अनुसार साबूदाना आपको तरोताजा रखने में मदद करता है, और इसे चावल के साथ प्रयोग किए जाने पर यह शरीर में बढ़ने वाली गर्मी को कम कर देता है।
 

2  दस्त लगने पर – जब किसी कारण से पेट खराब होने पर दस्त या अतिसार की समस्या होती है, तो ऐसे में बगैर दूध डाले साबूदाने की बनी हुई खीर बेहद असरकारक साबित होती है और तुरंत आराम देती है।

3 ब्लड प्रेशर – साबूदाने में पाया जाने वाल पोटेशियम रक्त संचार को बेहतर कर, उसे नियंत्रित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों के लिए भी फयदेमंद है।


4 पेट की समस्याएं – पेट में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर साबूदाना खाना काफी लाभप्रद सिद्ध होता है, और यह पाचनक्रिया को ठीक कर गैस, अपच आदि समस्याओं में भी लाभ देता है।

5 एनर्जी – साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा स्त्रोत है, जो शरीर में तुरंत और आवश्यक उर्जा देने में बेहद सहायक होता है। 

6 गर्भ के समय – साबूदाने में पाया जाने वाला फोलिक एसिड और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स गर्भावस्था के समय गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में सहायक होता है। 

7  हड्डियां बने मजबूत – साबूदाने में कैल्शियम, आयरन, विटामिन-के भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और अवश्यक लचीलेपन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

8 वजन – जिन लोगों में ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है उनक वजन आसानी से नहीं बढ़ पाता। ऐसे में साबूदाना एक बेहतर विकलप होता है जा उसका वजन बढ़ाने में सहायक है। 

9  थकान – साबूदाना खाने से थकान कम होती है। यह थकान कम कर शरीर में आवश्यक उर्जा के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। 

10  त्वचा – साबूदाने का फेसमास्क बनाकर लागाने से चेहरे पर कसाव आता है, और झुर्रियां भी कम होती है। यह त्वचा में कसाव बनाए रखने के लिए भी फायदेमंद है। 

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